Wednesday, January 30, 2008

me against myself in lectures




Friday, January 25, 2008

mine first.....many will follow




Sunday, January 20, 2008

Aadat

hiiii...this one i wrote long back...published in d clg magzine too....hope u like it...
आदत

जाने क्या हो गया है मुझे ,
चीजों को उलझाने की आदत पड़ गई,
आसान रास्तों पे , मुश्किल से जाने की आदत पड़ गई।
दूसरो से अब तो वक़्त भी उधार लेना पड़ता है,
के मुझे वक़्त बर्बाद करने की आदत पड़ गई।
सपने तो बहुत देखते है लोग पूरे करने के लिए,
पर मैं क्या करू, मुझे तो उन्हें सम्भालने की आदत पड़ गई।
अब तो हालत ऐसे आ गए है,
कि चलने के लिए भी हमे सहारे की आदत पड़ गई।
रेत ने तो उड़ जाना है , हवा के साथ,
पर मैं क्या करू, मुझे तो रेत के महल बनाने की आदत पड़ गई।
जानता हूँ कि हर अंत से एक शुरुआत होती है,
पर हमे तो हर शुरुआत मे अंत देखने कि आदत पड़ गई।
आदत पड़ गई है।
---- पुनीत ----